Amit Sharma Meet's Photo'

अमित शर्मा मीत

1989 | बरेली, भारत

ग़ज़ल 22

शेर 24

पुरानी देख कर तस्वीर तेरी

नया हर दिन गुज़रता जा रहा है

दिसम्बर की सर्दी है उस के ही जैसी

ज़रा सा जो छू ले बदन काँपता है

सच कहने का आख़िर ये अंजाम हुआ

सारी बस्ती में मैं ही बदनाम हुआ

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