सिर्फ़ तस्वीर रह गई बाक़ी

जिस में हम एक साथ बैठे हैं

अब वो कहता है कि ज़ंजीर बनी मेरे लिए

उस के पैरों में जो पायल कभी पहनाई थी

धूप बढ़ी तो वो भी अपने अपने पाँव खींच गए

मैं ने अपने हिस्से की जिन पेड़ों को हरियाली दी

किसी और को मैं तिरे सिवा नहीं चाहता

सो किसी से तेरा मुवाज़ना नहीं चाहता