Azhar Iqbal's Photo'

अज़हर इक़बाल

1978 | मेरठ, भारत

हिन्दुस्तान की नई पीढ़ी के मशहूर शायर

हिन्दुस्तान की नई पीढ़ी के मशहूर शायर

ग़ज़ल 10

शेर 10

नींद आएगी भला कैसे उसे शाम के बा'द

रोटियाँ भी मयस्सर हों जिसे काम के बा'द

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घुटन सी होने लगी उस के पास जाते हुए

मैं ख़ुद से रूठ गया हूँ उसे मनाते हुए

ये कैफ़ियत है मेरी जान अब तुझे खो कर

कि हम ने ख़ुद को भी पाया नहीं बहुत दिन से

क़ितआ 1

 

चित्र शायरी 2

वो माहताब अभी बाम पर नहीं आया मिरी दुआओं में शायद असर नहीं आया बहुत अजीब है यारों बुलंदियों का तिलिस्म जो एक बार गया लौट कर नहीं आया ये काएनात की वुसअत खुली नहीं मुझ पर मैं अपनी ज़ात से जब तक गुज़र नहीं आया बहुत दिनों से है बे-शक्ल सी मेरी मिट्टी बहुत दिनों से कोई कूज़ा-गर नहीं आया बस एक लम्हे को बे-पैराहन उसे देखा फिर इस के बाद मुझे कुछ नज़र नहीं आया हम अब भी दश्त में ख़ेमा लगाए बैठे हैं हमारे हिस्से में अपना ही घर नहीं आया ज़मीन बाँझ न हो जाए कुछ कहो 'अज़हर' सुख़न की शाख़ पे कब से समर नहीं आया

 

वीडियो 5

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
Ghutan si hone lagi hai uske paas jate huye

Azhar Iqbal is a young popular name of Urdu Poetry. अज़हर इक़बाल

Wo mahtab abhi baam par nahi aya

Azhar Iqbal is a young popular name of Urdu Poetry. अज़हर इक़बाल

Ye baar e ghum bhi uthaya nahi bahut din se

Azhar Iqbal is a young popular name of Urdu Poetry. अज़हर इक़बाल

गुलाब चाँदनी-रातों पे वार आए हम

अज़हर इक़बाल

ज़मीन-ए-दिल इक अर्से बा'द जल-थल हो रही है

अज़हर इक़बाल

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