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अज़ीज़ हैदराबादी

ग़ज़ल 18

शेर 25

ज़ोर क़िस्मत पे चल नहीं सकता

ख़ामुशी इख़्तियार करता हूँ

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उस ने सुन कर बात मेरी टाल दी

उलझनों में और उलझन डाल दी

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दुनिया की रविश देखी तिरी ज़ुल्फ़-ए-दोता में

बनती है ये मुश्किल से बिगड़ती है ज़रा में

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