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अज़ीज़ नबील

1976 | क़तर

क़तर में रहनेवाले प्रसिद्ध शायर

क़तर में रहनेवाले प्रसिद्ध शायर

ग़ज़ल 31

शेर 16

फिर नए साल की सरहद पे खड़े हैं हम लोग

राख हो जाएगा ये साल भी हैरत कैसी

चुपके चुपके वो पढ़ रहा है मुझे

धीरे धीरे बदल रहा हूँ मैं

हम क़ाफ़िले से बिछड़े हुए हैं मगर 'नबील'

इक रास्ता अलग से निकाले हुए तो हैं

पुस्तकें 10

Abjad-e-Ishq

 

2017

Firaq Gorakhpuri Shakhsiyat, Shairi aur Shanakht

 

2014

Irfan Siddiqui: Hayaat, Khidmaat Aur Sheri Kainaat

 

2015

Khwab Samunder

 

2011

Pandit Brij Narayan Chakbast:Shakhsiyat Aur Fan

 

 

Dastavez

Dom vo Som

2012

Dastavez

Shumara Number-005,006

2014

 

ऑडियो 5

आँखों के ग़म-कदों में उजाले हुए तो हैं

ख़ाक चेहरे पे मल रहा हूँ मैं

जिस तरफ़ चाहूँ पहुँच जाऊँ मसाफ़त कैसी

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI