Badnam Nazar's Photo'

बदनाम नज़र

1941 | शैख़पुरा, भारत

आँसू से नदी बने नदी समुंदर जाए

पर्बत का रोना मगर कोई देख पाए

खेल सियासत का बिल्ली से अब तो सीखा जाए

चूहों के वो प्राण ले पर मासी कहलाए

या बच्चे जन्ती रहे या सास की गाली खाए

बेटी जब बहू बने इक पल चैन पाए

जन्नत और जहन्नम का रेल खेल दिखलाए

इक डब्बे में आग रहे दूजा बर्फ़ जमाए

केवट चप्पू हाथ लिए अचरज में पड़ जाए

शाएर काग़ज़ की नय्या कैसे पार लगाए