Fana Nizami Kanpuri's Photo'

फ़ना निज़ामी कानपुरी

1922 - 1988 | कानपुर, भारत

सबसे लोकप्रिय शायरों में शामिल, अपने ख़ास तरन्नुम के लिए मशहूर।

सबसे लोकप्रिय शायरों में शामिल, अपने ख़ास तरन्नुम के लिए मशहूर।

ग़ज़ल 24

शेर 36

कोई पाबंद-ए-मोहब्बत ही बता सकता है

एक दीवाने का ज़ंजीर से रिश्ता क्या है

दुनिया-ए-तसव्वुर हम आबाद नहीं करते

याद आते हो तुम ख़ुद ही हम याद नहीं करते

तिरे वा'दों पे कहाँ तक मिरा दिल फ़रेब खाए

कोई ऐसा कर बहाना मिरी आस टूट जाए

  • शेयर कीजिए

पुस्तकें 1

Fana Nizami

Fan Aur Shakhsiyat

2003

 

चित्र शायरी 7

इक तिश्ना-लब ने बढ़ के जो साग़र उठा लिया हर बुल-हवस ने मय-कदा सर पर उठा लिया मौजों के इत्तिहाद का आलम न पूछिए क़तरा उठा और उठ के समुंदर उठा लिया तरतीब दे रहा था मैं फ़हरिस्त-ए-दुश्मनान यारों ने इतनी बात पे ख़ंजर उठा लिया मैं ऐसा बद-नसीब कि जिस ने अज़ल के रोज़ फेंका हुआ किसी का मुक़द्दर उठा लिया

ग़म हर इक आँख को छलकाए ज़रूरी तो नहीं अब्र उठे और बरस जाए ज़रूरी तो नहीं बर्क़ सय्याद के घर पर भी तो गिर सकती है आशियानों पे ही लहराए ज़रूरी तो नहीं राहबर राह मुसाफ़िर को दिखा देता है वही मंज़िल पे पहुँच जाए ज़रूरी तो नहीं नोक-ए-हर-ख़ार ख़तरनाक तो होती है मगर सब के दामन से उलझ जाए ज़रूरी तो नहीं ग़ुंचे मुरझाते हैं और शाख़ से गिर जाते हैं हर कली फूल ही बन जाए ज़रूरी तो नहीं

तिरे वा'दों पे कहाँ तक मिरा दिल फ़रेब खाए कोई ऐसा कर बहाना मिरी आस टूट जाए

 

वीडियो 13

This video is playing from YouTube

वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

फ़ना निज़ामी कानपुरी

फ़ना निज़ामी कानपुरी

फ़ना निज़ामी कानपुरी

फ़ना निज़ामी कानपुरी

फ़ना निज़ामी कानपुरी

डूबने वाले की मय्यत पर लाखों रोने वाले हैं

फ़ना निज़ामी कानपुरी

मेरे चेहरे से ग़म आश्कारा नहीं

फ़ना निज़ामी कानपुरी

रहता है मय-ख़ाने ही के आस-पास

फ़ना निज़ामी कानपुरी

हम आगही-ए-इश्क़ का अफ़्साना कहेंगे

फ़ना निज़ामी कानपुरी

ऑडियो 8

या रब मिरी हयात से ग़म का असर न जाए

ऐ हुस्न ज़माने के तेवर भी तो समझा कर

ग़म हर इक आँख को छलकाए ज़रूरी तो नहीं

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

संबंधित शायर

  • ख़ुमार बाराबंकवी ख़ुमार बाराबंकवी समकालीन
  • क़मर जलालवी क़मर जलालवी समकालीन
  • नुशूर वाहिदी नुशूर वाहिदी समकालीन
  • सुरूर बाराबंकवी सुरूर बाराबंकवी समकालीन
  • नूह नारवी नूह नारवी समकालीन
  • कँवर महेंद्र सिंह बेदी सहर कँवर महेंद्र सिंह बेदी सहर समकालीन
  • सीमाब अकबराबादी सीमाब अकबराबादी समकालीन

"कानपुर" के और शायर

  • ज़ेब ग़ौरी ज़ेब ग़ौरी
  • नुशूर वाहिदी नुशूर वाहिदी
  • मतीन नियाज़ी मतीन नियाज़ी
  • मयंक अवस्थी मयंक अवस्थी
  • अबुल हसनात हक़्क़ी अबुल हसनात हक़्क़ी
  • असलम महमूद असलम महमूद