Farrukh Jafari's Photo'

फ़र्रुख़ जाफ़री

1941 | इलाहाबाद, भारत

फ़र्रुख़ जाफ़री

ग़ज़ल 20

शेर 7

कोई ठहरता नहीं यूँ तो वक़्त के आगे

मगर वो ज़ख़्म कि जिस का निशाँ नहीं जाता

मसअला ये है कि उस के दिल में घर कैसे करें

दरमियाँ के फ़ासले का तय सफ़र कैसे करें

जिस्म के अंदर जो सूरज तप रहा है

ख़ून बन जाए तो फिर ठंडा करेंगे

थे उस के हाथ लहू में हमारे ग़र्क़ मगर

ज़रा भी शर्म आई उसे मुकरते हुए

हर रोज़ दिखाई दें सब लोग वहीं लेकिन

जब ढूँडने निकलें तो मिलता ही नहीं कोई

पुस्तकें 2

इक ज़रा सा बोझ

 

2014

Harf-e-Aaghaz

 

1997

 

"इलाहाबाद" के और शायर

  • फ़िराक़ गोरखपुरी फ़िराक़ गोरखपुरी
  • आनंद नारायण मुल्ला आनंद नारायण मुल्ला
  • शबनम नक़वी शबनम नक़वी
  • अफ़ज़ल इलाहाबादी अफ़ज़ल इलाहाबादी
  • ख़्वाजा जावेद अख़्तर ख़्वाजा जावेद अख़्तर
  • ज़फ़र अंसारी ज़फ़र ज़फ़र अंसारी ज़फ़र
  • अब्दुल हमीद अब्दुल हमीद
  • अजमल अजमली अजमल अजमली
  • आज़म करेवी आज़म करेवी
  • साहिल अहमद साहिल अहमद