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फ़ुज़ैल जाफ़री

1936 - 2018 | मुंबई, भारत

प्रतिष्ठित आधुनिक आलोचक

प्रतिष्ठित आधुनिक आलोचक

ग़ज़ल 34

शेर 23

ज़हर मीठा हो तो पीने में मज़ा आता है

बात सच कहिए मगर यूँ कि हक़ीक़त लगे

भूले-बिसरे हुए ग़म फिर उभर आते हैं कई

आईना देखें तो चेहरे नज़र आते हैं कई

चमकते चाँद से चेहरों के मंज़र से निकल आए

ख़ुदा हाफ़िज़ कहा बोसा लिया घर से निकल आए

पुस्तकें 8

अफ़्सोस हासिल का

 

2009

Chattan Aur Pani

 

1974

Kaman Aur Zakhm

 

1986

Rang-e-Shikasta

 

1980

Sahra Mein Lafz

 

1994

इज़हार

शुमारा नम्बर-001

1975

Shumara Number-002

1975

Shumara Number-001

1975

 

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