हैरत इलाहाबादी
चित्र शायरी 3
ऑडियो 4
आगाह अपनी मौत से कोई बशर नहीं
बोसा लिया जो चश्म का बीमार हो गए
ये महव हुए देख के बे-साख़्ता-पन को
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