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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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हनीफ़ फ़ौक़

ग़ज़ल 11

अशआर 12

उदास रातों की तीरगी में कोई तारा कोई जुगनू

किसी का नक़्श-ए-क़दम ही चमके तो नूर का ए'तिबार आए

इक जनम के प्यासे भी सैर हों तो हम जानें

यूँ तो रहमत-ए-यज़्दाँ चार-सू बरसती है

उन्हें क्या फ़िक्र कि पूछें दिल-ए-बीमार का हाल

बे-नियाज़ाना वो अंदाज़-ए-सुख़न है कि जो था

वक़्त की लाश पे रोने को जिगर है किस का

किस जनाज़े को लिए अहल-ए-नज़र आते हैं

मैं ने अपनी पलकों पर ग़म-कदे सजाए हैं

आरज़ू के मातम में सोगवार हस्ती है

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