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हक़ीर

ग़ज़ल 10

शेर 22

टूटें वो सर जिस में तेरी ज़ुल्फ़ का सौदा नहीं

फूटें वो आँखें कि जिन को दीद का लपका नहीं

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या उस से जवाब-ए-ख़त लाना या क़ासिद इतना कह देना

बचने का नहीं बीमार तिरा इरशाद अगर कुछ भी हुआ

इश्क़ के फंदे से बचिए 'हक़ीर'-ए-ख़स्ता-दिल

इस का है आग़ाज़ शीरीं और है अंजाम तल्ख़

ई-पुस्तक 3

Chamanistan-e-Fasahat

 

1940

दीवान-ए-हक़ीर