Haseeb Soz's Photo'

हसीब सोज़

बदायूँ, भारत

ग़ज़ल 14

शेर 8

ये बद-नसीबी नहीं है तो और फिर क्या है

सफ़र अकेले किया हम-सफ़र के होते हुए

ये इंतिक़ाम है या एहतिजाज है क्या है

ये लोग धूप में क्यूँ हैं शजर के होते हुए

यहाँ मज़बूत से मज़बूत लोहा टूट जाता है

कई झूटे इकट्ठे हों तो सच्चा टूट जाता है

  • शेयर कीजिए

ई-पुस्तक 3

Barson Baad

 

2009

Dhoop Phir Nikal Aai

 

2017

लम्हे लम्हे

 

1982

 

वीडियो 7

This video is playing from YouTube

वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

हसीब सोज़

हसीब सोज़

ख़ुद को इतना जो हवा-दार समझ रक्खा है

हसीब सोज़

दर्द आसानी से कब पहलू बदल कर निकला

हसीब सोज़

नज़र न आए हम अहल-ए-नज़र के होते हुए

हसीब सोज़

यहाँ मज़बूत से मज़बूत लोहा टूट जाता है

हसीब सोज़

हमारे ख़्वाब सब ताबीर से बाहर निकल आए

हसीब सोज़

"बदायूँ" के और शायर

  • अहमद अज़ीम अहमद अज़ीम
  • मज़ाक़ बदायुनी मज़ाक़ बदायुनी
  • फ़हमी बदायूनी फ़हमी बदायूनी
  • इमरान बदायूनी इमरान बदायूनी
  • अज़ीज़ बदायूनी अज़ीज़ बदायूनी
  • मुनव्वर बदायुनी मुनव्वर बदायुनी
  • फ़ानी बदायुनी फ़ानी बदायुनी
  • वसीम नादिर वसीम नादिर
  • ख़ालिद नदीम बदायूनी ख़ालिद नदीम बदायूनी