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हातिम अली मेहर

1815 - 1879

मिर्ज़ा ग़ालिब के समकालीन और मित्र हाई कोर्ट के वकील एवं माननीय मजिस्ट्रेट

मिर्ज़ा ग़ालिब के समकालीन और मित्र हाई कोर्ट के वकील एवं माननीय मजिस्ट्रेट

ग़ज़ल 49

शेर 68

किसी का रुख़ हमें क़ुरआन का जवाब मिला

ख़ुदा का शुक्र है बुत साहिब-ए-किताब मिला

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दाग़ों की बस दिखा दी दिवाली में रौशनी

हम सा होगा कोई जहाँ में दिवालिया

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अब्र आए तो शराब पिएँ बादा-ख़्वार हैं

उम्मीद-वार-ए-रहमत-ए-परवरदिगार हैं

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पुस्तकें 2

Intikhab-e-Kalam Hatim Ali Mehar

 

1997

Mirza Hatim Ali Beg Mahr: Hayat Aur Adabi Pas-Manzar

 

1984

 

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