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होश तिर्मिज़ी

होश तिर्मिज़ी

ग़ज़ल 11

अशआर 6

दिल को ग़म रास है यूँ गुल को सबा हो जैसे

अब तो ये दर्द की सूरत ही दवा हो जैसे

दश्त-ए-वफ़ा में जल के रह जाएँ अपने दिल

वो धूप है कि रंग हैं काले पड़े हुए

मिलने को है खमोशी-ए-अहल-ए-जुनूँ की दाद

उठने को है ज़मीं से धुआँ देखते रहो

अब तो दीवानों से यूँ बच के गुज़र जाती है

बू-ए-गुल भी तिरे दामन की हवा हो जैसे

तज़ईन-ए-बज़्म-ए-ग़म के लिए कोई शय तो हो

रौशन चराग़-ए-दिल सही जाम-ए-मय तो हो

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

Jashn-e-Rekhta | 2-3-4 December 2022 - Major Dhyan Chand National Stadium, Near India Gate, New Delhi

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