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इक़बाल कौसर

ग़ज़ल 13

शेर 10

ध्यान आया मुझे रात की तन्हा-सफ़री का

यक-दम कोई साया सा गली से निकल आया

पर ले के किधर जाएँ कुछ दूर तक उड़ आएँ

दम जितना मयस्सर है ये ठहरी हवा काटें

तिरे जुज़्व जुज़्व ख़याल को रग-ए-जाँ में पूरा उतार कर

वो जो बार बार की शक्ल थी उसे एक बार बना दिया

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