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इक़बाल कौसर

ग़ज़ल 13

शेर 10

पर ले के किधर जाएँ कुछ दूर तक उड़ आएँ

दम जितना मयस्सर है ये ठहरी हवा काटें

मिरी ख़ाक उस ने बिखेर दी सर-ए-रह ग़ुबार बना दिया

मैं जब सका शुमार में मुझे बे-शुमार बना दिया

तिरी पहली दीद के साथ ही वो फ़ुसूँ भी था

तुझे देख कर तुझे देखना मुझे गया

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