ग़ज़ल 39

शेर 13

भूक से या वबा से मरना है

फ़ैसला आदमी को करना है

शाम को तेरा हँस कर मिलना

दिन भर की उजरत होती है

लड़कियाँ माओं जैसे मुक़द्दर क्यूँ रखती हैं

तन सहरा और आँख समुंदर क्यूँ रखती हैं

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अकेले घर में भरी दोपहर का सन्नाटा

वही सुकून वही उम्र भर का सन्नाटा

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कच्ची उम्रों में भी अकेली रही

मैं सदा अपनी ही सहेली रही

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पुस्तकें 1

Kunj Peele Phoolon Ka

 

1986

 

वीडियो 5

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शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

इशरत आफ़रीं

इशरत आफ़रीं

Ishrat Afreen in Jashn e Nida Fazli 2010

इशरत आफ़रीं

ख़ुश्बू संदल और न गहना दुख देगा

इशरत आफ़रीं

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