noImage

जावेद कमाल रामपुरी

1930 - 1978 | रामपुर, भारत

ग़ज़ल 14

नज़्म 4

 

शेर 10

हाथ फिर बढ़ रहा है सू-ए-जाम

ज़िंदगी की उदासियों को सलाम

  • शेयर कीजिए

अब तो जाओ रस्म-ए-दुनिया की

मैं ने दीवार भी गिरा दी है

  • शेयर कीजिए

दिन के सीने में धड़कते हुए लम्हों की क़सम

शब की रफ़्तार-ए-सुबुक-गाम से जी डरता है

  • शेयर कीजिए

क़ितआ 7

ई-पुस्तक 2

अावाज़ ना दो

 

1993

 

"रामपुर" के और शायर

  • रसा रामपुरी रसा रामपुरी
  • फ़रहान सालिम फ़रहान सालिम
  • शाहिद इश्क़ी शाहिद इश्क़ी
  • अज़हर इनायती अज़हर इनायती
  • उरूज ज़ैदी बदायूनी उरूज ज़ैदी बदायूनी
  • महशर इनायती महशर इनायती
  • शाद आरफ़ी शाद आरफ़ी
  • हिज्र नाज़िम अली ख़ान हिज्र नाज़िम अली ख़ान
  • शैख़ अली बख़्श बीमार शैख़ अली बख़्श बीमार
  • मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल