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जोशिश अज़ीमाबादी

1737 - 1801

मीर के समकालीन, अज़ीमाबाद स्कूल के प्रतिष्ठित शायर, दिल्ली स्कूल के रंग में शायरी के लिए मशहूर

मीर के समकालीन, अज़ीमाबाद स्कूल के प्रतिष्ठित शायर, दिल्ली स्कूल के रंग में शायरी के लिए मशहूर

ग़ज़ल 59

शेर 43

उस के रुख़्सार पर कहाँ है ज़ुल्फ़

शोला-ए-हुस्न का धुआँ है ज़ुल्फ़

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ध्यान में उस के फ़ना हो कर कोई मुँह देख ले

दिल वो आईना नहीं जो हर कोई मुँह देख ले

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हुस्न और इश्क़ का मज़कूर होवे जब तक

मुझ को भाता नहीं सुनना किसी अफ़्साने का

क़ितआ 1

 

ई-पुस्तक 5

दीवान-ए-जोशिश

 

1941

Deewan-e-Joshish

 

1976

Deewan-e-Joshish

 

1941

Deewan-e-Joshish

 

 

दीवान-ए-जोशिश

 

1976