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कैफ़ अहमद सिद्दीकी

1943 | सीतापुर, भारत

ग़ज़ल 20

नज़्म 8

शेर 14

इक बरस भी अभी नहीं गुज़रा

कितनी जल्दी बदल गए चेहरे

महसूस हो रहा है कि मैं ख़ुद सफ़र में हूँ

जिस दिन से रेल पर मैं तुझे छोड़ने गया

तन्हाई की दुल्हन अपनी माँग सजाए बैठी है

वीरानी आबाद हुई है उजड़े हुए दरख़्तों में

ई-पुस्तक 4

Dilchasp Nazmein

 

1971

Hisab Lafz Lafz Ka

 

1985

Sada Bahar Nazmein

 

1980

Suraj Ki Aankh

 

1977

 

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