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Khalid Nadeem Shaani's Photo'

ख़ालिद नदीम शानी

पंजाब, पाकिस्तान

मक़बूल-ए-आम उर्दू शायरों में शुमार

मक़बूल-ए-आम उर्दू शायरों में शुमार

ख़ालिद नदीम शानी

ग़ज़ल 13

अशआर 8

हमी वो इल्म के रौशन चराग़ हैं जिन को

हवा बुझाती नहीं है सलाम करती है

जिस तरह आप ने बीमार से रुख़्सत ली है

साफ़ लगता है जनाज़े में नहीं आएँगे

कहाँ से आई थी आख़िर तिरी तलब मुझ में

ख़ुदा ने मुझ को बनाया तो मैं अकेला था

मैं अगर ख़ुद को मार डालूँ तो

क्या बचेगा तिरी कहानी में

तुम इन लकीरों में इक ख़ुशी भी तलाश कर लो तो मो'जिज़ा है

कि मैं तो बचपन से जानता हूँ मिरी हथेली का नाम दुख है

वीडियो 5

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

ख़ालिद नदीम शानी

ख़ालिद नदीम शानी

ख़ालिद नदीम शानी

इस तरह ख़्वाब-सफ़ीने का मज़ा लेता हूँ

ख़ालिद नदीम शानी

मुझे बताया गया था यहाँ मोहब्बत है

ख़ालिद नदीम शानी

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