aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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ख़्वाजा अज़ीज़ुल हसन मज्ज़ूब

1884 - 1944

ख़्वाजा अज़ीज़ुल हसन मज्ज़ूब

ग़ज़ल 10

अशआर 2

हर तमन्ना दिल से रुख़्सत हो गई

अब तो जा अब तो ख़ल्वत हो गई

जिस्म बे-हिस बे-शिकन बिस्तर रहा

मैं नए अंदाज़ से मुज़्तर रहा

 

पुस्तकें 17

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