noImage

ख़्वाजा हसन 'हसन'

शेर 4

उमँड के आँख से इक बार बह चले आँसू

हँसी हँसी में जो ज़िक्र-ए-विदा-ए-यार आया

  • शेयर कीजिए

रही बे-क़रारी असीरी की यूँ ही

तो सय्याद टुकड़े तिरा दाम होगा

  • शेयर कीजिए

वो जब तक कि ज़ुल्फ़ें सँवारा किया

खड़ा उस पे मैं जान वारा किया

  • शेयर कीजिए

Added to your favorites

Removed from your favorites