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किश्वर नाहीद

1940 | इस्लामाबाद, पाकिस्तान

पाकिस्तानी शायरा , अपने स्त्री-वादी विचारों और धार्मिक कट्टरपन के विरोध के लिए मशहूर

पाकिस्तानी शायरा , अपने स्त्री-वादी विचारों और धार्मिक कट्टरपन के विरोध के लिए मशहूर

आँख की पुतली सब कुछ देखे देखे अपनी ज़ात

उजला धागा मैला होवे लगें जो मैले हात

प्रेम किया और साथ छोटा कैसे थे वो लोग

हम ने प्यारों का अब तक देखा संजोग

मैं बहरी थी कागा बोला सुन सकी संदेश

दिल कहता है कल आएँगे पिया बदल के भेस

तकिया भीगा साँस भी डूबी मुरझाई हर आस

दिल को राह पे लाने की हर आस बनी संयास

ठंडी रात और ठंडा बिस्तर सखी-री काँटे आए

लोग कहें जो दुख साँझे हों दिल हल्का हो जाए

सूत के कच्चे धागे जैसे रिश्ते पर इतराऊँ

साजन हाथ भी छू लें तो मैं फूल गुलाब बन जाऊँ

तपते लम्हे दहकते चेहरे सब कुछ ध्यान में लाऊँ

पत्ती पत्ती चाहे तोड़ूँ दिल का बोझ हटाऊँ