Meer Mehdi Majrooh's Photo'

मीर मेहदी मजरूह

1833 - 1903 | दिल्ली, भारत

मीर मेहदी मजरूह

ग़ज़ल 20

शेर 37

चुरा के मुट्ठी में दिल को छुपाए बैठे हैं

बहाना ये है कि मेहंदी लगाए बैठे हैं

  • शेयर कीजिए

क्या हमारी नमाज़ क्या रोज़ा

बख़्श देने के सौ बहाने हैं

  • शेयर कीजिए

ग़ैरों को भला समझे और मुझ को बुरा जाना

समझे भी तो क्या समझे जाना भी तो क्या जाना

  • शेयर कीजिए

ये जो चुपके से आए बैठे हैं

लाख फ़ित्ने उठाए बैठे हैं

  • शेयर कीजिए

शग़्ल-ए-उल्फ़त को जो अहबाब बुरा कहते हैं

कुछ समझ में नहीं आता कि ये क्या कहते हैं

  • शेयर कीजिए

रुबाई 7

पुस्तकें 4

Deewan-e-Majrooh

 

1978

दीवान-ए-मजरूह

 

1889

Deewan-e-Majrooh

Mazhar-e-maani

1898

Meer Mehdi Majrooh : Hayat Aur Tasneef

 

1999

 

संबंधित शायर

  • अमीर मीनाई अमीर मीनाई समकालीन
  • मिर्ज़ा ग़ालिब मिर्ज़ा ग़ालिब गुरु
  • मियाँ दाद ख़ां सय्याह मियाँ दाद ख़ां सय्याह समकालीन

"दिल्ली" के और शायर

  • शैख़  ज़हूरूद्दीन हातिम शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम
  • शाह नसीर शाह नसीर
  • आबरू शाह मुबारक आबरू शाह मुबारक
  • राजेन्द्र मनचंदा बानी राजेन्द्र मनचंदा बानी
  • अनीसुर्रहमान अनीसुर्रहमान
  • हसरत मोहानी हसरत मोहानी
  • ताबाँ अब्दुल हई ताबाँ अब्दुल हई
  • ख़्वाजा मीर दर्द ख़्वाजा मीर दर्द
  • बेख़ुद देहलवी बेख़ुद देहलवी
  • अनस ख़ान अनस ख़ान