Font by Mehr Nastaliq Web

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर
noImage

मिर्ज़ा अली लुत्फ़

- 1813

मिर्ज़ा अली लुत्फ़

ग़ज़ल 10

अशआर 15

आज क्या जाने वो क्यूँ आराम-ए-जाँ आया नहीं

हर्फ़-ए-रंजिश कल तो कोई दरमियाँ आया नहीं

आज क्या जाने वो क्यूँ आराम-ए-जाँ आया नहीं

हर्फ़-ए-रंजिश कल तो कोई दरमियाँ आया नहीं

यही तो कुफ़्र है यारान-ए-बे-ख़ुदी के हुज़ूर

जो कुफ़्र-ओ-दीं का मिरे यार इम्तियाज़ रहा

यही तो कुफ़्र है यारान-ए-बे-ख़ुदी के हुज़ूर

जो कुफ़्र-ओ-दीं का मिरे यार इम्तियाज़ रहा

बैठ कर मस्जिद में रिंदों से इतना बिगड़ए

शैख़-जी आते हो मयख़ाने के भी अक्सर तरफ़

रुबाई 2

 

पुस्तकें 14

Recitation

बोलिए