Musavvir Sabzwari's Photo'

मुसव्विर सब्ज़वारी

1932 - 2002 | गुड़गाँव, भारत

प्रतिष्ठित आधुनिक शायर

प्रतिष्ठित आधुनिक शायर

ग़ज़ल 53

नज़्म 4

 

शेर 25

अपने होने का कुछ एहसास होने से हुआ

ख़ुद से मिलना मिरा इक शख़्स के खोने से हुआ

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वो सर्दियों की धूप की तरह ग़ुरूब हो गया

लिपट रही है याद जिस्म से लिहाफ़ की तरह

सजनी की आँखों में छुप कर जब झाँका

बिन होली खेले ही साजन भीग गया

ई-पुस्तक 5

Barg-e-Aatish Sawar

 

1983

माँझी धीरे चल

 

1971

Musavvir Sabzwari: Shakhsiyat Aur Fan

 

1996

Patjhad Ke Musafir

 

1984

Yed Dhuan Sa Kahan Se Uthta Hai

 

1991

 

चित्र शायरी 4

अपने होने का कुछ एहसास न होने से हुआ ख़ुद से मिलना मिरा इक शख़्स के खोने से हुआ

अपने होने का कुछ एहसास न होने से हुआ ख़ुद से मिलना मिरा इक शख़्स के खोने से हुआ

अपने होने का कुछ एहसास न होने से हुआ ख़ुद से मिलना मिरा इक शख़्स के खोने से हुआ

 

ऑडियो 14

आँखें यूँ बरसीं पैराहन भीग गया

कई ज़मानों के दरिया-ए-नील छोड़ गया

कड़े हैं कोस सफ़र दूर का ज़रूरी है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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