मुज़फ़्फ़र अबदाली
ग़ज़ल 11
नज़्म 4
अशआर 5
बहकना मेरी फ़ितरत में नहीं पर
सँभलने में परेशानी बहुत है
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बहकना मेरी फ़ितरत में नहीं पर
सँभलने में परेशानी बहुत है
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रेत पर इक निशान है शायद
ये हमारा मकान है शायद
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रेत पर इक निशान है शायद
ये हमारा मकान है शायद
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रह-गुज़र का है तक़ाज़ा कि अभी और चलो
एक उम्मीद जो मंज़िल के निशाँ तक पहुँची
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वीडियो 10
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