ग़ज़ल 33

शेर 18

बरस रही थी बारिश बाहर

और वो भीग रहा था मुझ में

यूँ तुझे देख के चौंक उठती हैं सोई यादें

जैसे सन्नाटे में आवाज़ लगा दे कोई

बस हम दोनों ज़िंदा हैं

बाक़ी दुनिया फ़ानी है

बिखरता जाता है कमरे में सिगरटों का धुआँ

पड़ा है ख़्वाब कोई चाय की प्याली में

बच्चे ने तितली पकड़ कर छोड़ दी

आज मुझ को भी ख़ुदा अच्छा लगा

पुस्तकें 2

Aye Shaam Hum Sukhan Ho

 

1997

Gumbad-e-Khauf Se Basharat

 

1984

 

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