राज़ मुरादाबादी
ग़ज़ल 23
अशआर 32
रंग-ओ-बू के पर्दे में कौन ये ख़िरामाँ है
हर नफ़स मोअत्तर है हर नज़र ग़ज़ल-ख़्वाँ है
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वीडियो 9
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