रहमान फ़ारिस

ग़ज़ल 15

नज़्म 8

अशआर 7

कहानी ख़त्म हुई और ऐसी ख़त्म हुई

कि लोग रोने लगे तालियाँ बजाते हुए

  • शेयर कीजिए

तेरे बिन घड़ियाँ गिनी हैं रात दिन

नौ बरस ग्यारह महीने सात दिन

  • शेयर कीजिए

शजर ने पूछा कि तुझ में ये किस की ख़ुशबू है

हवा-ए-शाम-ए-अलम ने कहा उदासी की

वो पहले सिर्फ़ मिरी आँख में समाया था

फिर एक रोज़ रगों तक उतर गया मुझ में

मिरी तो सारी दुनिया बस तुम्ही हो

ग़लत क्या है जो दुनिया-दार हूँ मैं

पुस्तकें 1

 

वीडियो 11

This video is playing from YouTube

वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

रहमान फ़ारिस

Baithe hain chain se kahin jana to hai nahi

रहमान फ़ारिस

Chand aa betha hai pehlu mein, sitaro takhliya

रहमान फ़ारिस

Ishq saccha hai to kyun darte jhijhakte jaanve

रहमान फ़ारिस

Khaak udtii hai raat bhar mujh mein

रहमान फ़ारिस

Rehman Faris - Reciting at Jashn-e-Abbas Tabish

रहमान फ़ारिस

Rehman Faris poetry on Iqbal

रहमान फ़ारिस

Sadaayen dete huye khaak udaate huye

रहमान फ़ारिस

रहमान फ़ारिस

ख़ाक उड़ती है रात-भर मुझ में

रहमान फ़ारिस

सदाएँ देते हुए और ख़ाक उड़ाते हुए

रहमान फ़ारिस

संबंधित शायर

"इस्लामाबाद" के और शायर

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

Jashn-e-Rekhta | 2-3-4 December 2022 - Major Dhyan Chand National Stadium, Near India Gate, New Delhi

GET YOUR FREE PASS
बोलिए