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रियाज़ ख़ैराबादी

1853 - 1934

शराब पर शायरी के लिए प्रसिध्द , जब कि कहा जाता है कि उन्हों ने शराब को कभी हाथ नहीं लगाया।

शराब पर शायरी के लिए प्रसिध्द , जब कि कहा जाता है कि उन्हों ने शराब को कभी हाथ नहीं लगाया।

ग़ज़ल 130

शेर 106

अच्छी पी ली ख़राब पी ली

जैसी पाई शराब पी ली

देखिएगा सँभल कर आईना

सामना आज है मुक़ाबिल का

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दिल-जलों से दिल-लगी अच्छी नहीं

रोने वालों से हँसी अच्छी नहीं

ई-पुस्तक 10

Intikhab Kulliyat-e-Riyaz Khairabadi

 

1982

Intikhab-e-Fitna

 

 

इंतिख़ाब-ए-रियाज़ ख़ैराबादी

 

1959

Intikhab-e-Riyaz Khairabadi

 

1983

कलाम-ए-रियाज़ ख़ैराआबादी

 

1960

Maikhana-e-Riyaz

 

1945

क़ुल्क़ुल-ए-मीना

 

1998

रियाज़ ख़ैराबादी

हयात और अदबी ख़िदमात

1974

Riyaz Khairabadi

 

1964

Riyaz-e-Rizwan

 

1961

 

ऑडियो 3

कोई मुँह चूम लेगा इस नहीं पर

बाम पर आए कितनी शान से आज

कुछ भी हो 'रियाज़' आँख में आँसू नहीं आते

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

 

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