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सईद क़ैस

- 2018 | बहरैन

ग़ज़ल 17

नज़्म 3

 

शेर 9

चाँद मशरिक़ से निकलता नहीं देखा मैं ने

तुझ को देखा है तो तुझ सा नहीं देखा मैं ने

ये वाक़िआ' मिरी आँखों के सामने का है

शराब नाच रही थी गिलास बैठे रहे

तुम अपने दरिया का रोना रोने जाते हो

हम तो अपने सात समुंदर पीछे छोड़ आए हैं

ई-पुस्तक 1

Kulliyat-e-Saeed Qais

 

2016

 

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