ग़ज़ल 19

शेर 4

इक अदावत से फ़राग़त नहीं मिलती वर्ना

कौन कहता है मोहब्बत नहीं कर सकते हम

साल गुज़र जाता है सारा

और कैलन्डर रह जाता है

नमी जगह बना रही है आँख में

ये तीर अब कमान से निकालिए

पुस्तकें 1

Lafzon Se Pahle

 

2014

 

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