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शाद आरफ़ी

1900 - 1964

नई विचार-दिशा देने वाले शायरों में विख्यात।

नई विचार-दिशा देने वाले शायरों में विख्यात।

ग़ज़ल 28

नज़्म 3

 

शेर 11

'शाद' ग़ैर-मुमकिन है शिकवा-ए-बुताँ मुझ से

मैं ने जिस से उल्फ़त की उस को बा-वफ़ा पाया

कटती है आरज़ू के सहारे पे ज़िंदगी

कैसे कहूँ किसी की तमन्ना चाहिए

तुम सलामत रहो क़यामत तक

और क़यामत कभी आए 'शाद'

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ई-पुस्तक 11

कुल्लियात-ए-शाद आरफ़ी

 

1975

Makateeb-o-Mazameen-e-Shad Arifi

 

2016

सफ़ीना चाहिए

 

1965

Samaj

 

 

शाद अार्फ़ी की ग़ज़लें

 

1974

Shad Aarfi

 

1956

Shad Aarfi : Hayat, Shairi, Intikhab-e-Kulliyat

 

1988

Shad Aarfi: Shakhsiyat Aur Fan

 

1977

Shad Aarfi: Shakhsiyat Aur Fan

 

1967

Shokhi-e-Tahreer

Shaad aarfi ki nazmen

1967

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