शहपर रसूल के शेर
मुझे भी लम्हा-ए-हिजरत ने कर दिया तक़्सीम
निगाह घर की तरफ़ है क़दम सफ़र की तरफ़
मैं ने भी देखने की हद कर दी
वो भी तस्वीर से निकल आया
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कोई साया न कोई हम-साया
आब-ओ-दाना ये किस जगह लाया
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दूसरों के ज़ख़्म बुन कर ओढ़ना आसाँ नहीं
सब क़बाएँ हेच हैं मेरी रिदा के सामने
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रेख़्ता का इक नया मज्ज़ूब है 'शहपर' रसूल
शोहरत उस के नाम पर इक नंग है बोहतान है
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'शहपर' मिरी हदों का तअय्युन करे कोई
आँखों से बह रहूँ कि रगों में फिरा करूँ
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टैग : आँख
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अब तक तो अपने आप से पीछा न छुट सका
मुमकिन है कल से आप के हक़ में दुआ करूँ
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टैग : दुआ
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ख़याल-ओ-ख़्वाब को नाम-ओ-नसब को अच्छा हो
पुराने सालों से ये साल सब को अच्छा हो
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टैग : नया साल
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