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सिराज औरंगाबादी

1712 - 1764 | औरंगाबाद, भारत

सूफ़ी शायर, जिनकी मशहूर ग़ज़ल ' ख़बर-ए-तहय्युर-ए-इश्क़ ' बहुत गाई गई है

सूफ़ी शायर, जिनकी मशहूर ग़ज़ल ' ख़बर-ए-तहय्युर-ए-इश्क़ ' बहुत गाई गई है

सिराज औरंगाबादी

ग़ज़ल 124

अशआर 102

ख़बर-ए-तहय्युर-ए-इश्क़ सुन जुनूँ रहा परी रही

तो तू रहा तो मैं रहा जो रही सो बे-ख़बरी रही

डूब जाता है मिरा जी जो कहूँ क़िस्सा-ए-दर्द

नींद आती है मुझी कूँ मिरे अफ़्साने में

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फ़िदा कर जान अगर जानी यही है

अरे दिल वक़्त-ए-बे-जानी यही है

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इश्क़ और अक़्ल में हुई है शर्त

जीत और हार का तमाशा है

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शह-ए-बे-ख़ुदी ने अता किया मुझे अब लिबास-ए-बरहनगी

ख़िरद की बख़िया-गरी रही जुनूँ की पर्दा-दरी रही

पुस्तकें 11

चित्र शायरी 2

 

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ऑडियो 5

कौन कहता है जफ़ा करते हो तुम

ख़बर-ए-तहय्युर-ए-इश्क़ सुन न जुनूँ रहा न परी रही

ख़ाक हूँ ए'तिबार की सौगंद

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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