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ताबाँ अब्दुल हई

1715 - 1749 | दिल्ली, भारत

शायरी के अलावा अपनी सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध। कम उम्र में देहांत हुआ

शायरी के अलावा अपनी सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध। कम उम्र में देहांत हुआ

ग़ज़ल 48

शेर 67

किस किस तरह की दिल में गुज़रती हैं हसरतें

है वस्ल से ज़ियादा मज़ा इंतिज़ार का

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दर्द-ए-सर है ख़ुमार से मुझ को

जल्द ले कर शराब साक़ी

कई फ़ाक़ों में ईद आई है

आज तू हो तो जान हम-आग़ोश

पुस्तकें 1

दीवान-ए-ताबाँ

 

1935

 

ऑडियो 9

ग़म में रोता हूँ तिरे सुब्ह कहीं शाम कहीं

ग़ैर के हाथ में उस शोख़ का दामान है आज

तू भली बात से ही मेरी ख़फ़ा होता है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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