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ताबाँ अब्दुल हई

1715 - 1749 | दिल्ली, भारत

शायरी के अलावा अपनी सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध। कम उम्र में देहांत हुआ

शायरी के अलावा अपनी सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध। कम उम्र में देहांत हुआ

ताबाँ अब्दुल हई

ग़ज़ल 48

अशआर 67

किस किस तरह की दिल में गुज़रती हैं हसरतें

है वस्ल से ज़ियादा मज़ा इंतिज़ार का

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कई फ़ाक़ों में ईद आई है

आज तू हो तो जान हम-आग़ोश

दर्द-ए-सर है ख़ुमार से मुझ को

जल्द ले कर शराब साक़ी

मोहब्बत तू मत कर दिल उस बेवफ़ा से

दिल उस बेवफ़ा से मोहब्बत तू मत कर

जब तलक रहे जीता चाहिए हँसे बोले

आदमी को चुप रहना मौत की निशानी है

पुस्तकें 1

 

ऑडियो 9

ग़म में रोता हूँ तिरे सुब्ह कहीं शाम कहीं

ग़ैर के हाथ में उस शोख़ का दामान है आज

तू भली बात से ही मेरी ख़फ़ा होता है

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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