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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

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Tahzeeb Hafi's Photo'

युवा पीढ़ी के प्रतिनिधि शायर, जो अपने मुन्फ़रिद अंदाज़ की शाइरी के लिए जाने जाते हैं

युवा पीढ़ी के प्रतिनिधि शायर, जो अपने मुन्फ़रिद अंदाज़ की शाइरी के लिए जाने जाते हैं

तहज़ीब हाफ़ी

ग़ज़ल 43

नज़्म 8

अशआर 23

मैं कि काग़ज़ की एक कश्ती हूँ

पहली बारिश ही आख़िरी है मुझे

तेरा चुप रहना मिरे ज़ेहन में क्या बैठ गया

इतनी आवाज़ें तुझे दीं कि गला बैठ गया

तुझ को पाने में मसअला ये है

तुझ को खोने के वसवसे रहेंगे

ये एक बात समझने में रात हो गई है

मैं उस से जीत गया हूँ कि मात हो गई है

अपनी मस्ती में बहता दरिया हूँ

मैं किनारा भी हूँ भँवर भी हूँ

क़ितआ 1

 

पुस्तकें 1

 

वीडियो 50

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ऑडियो 3

तेरा चुप रहना मिरे ज़ेहन में क्या बैठ गया

पराई आग पे रोटी नहीं बनाऊँगा

ये एक बात समझने में रात हो गई है

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