Umair Manzar's Photo'

उमैर मंज़र

1974 | लखनऊ, भारत

ग़ज़ल 6

शेर 10

बढ़ते चले गए जो वो मंज़िल को पा गए

मैं पत्थरों से पाँव बचाने में रह गया

साथी मिरे कहाँ से कहाँ तक पहुँच गए

मैं ज़िंदगी के नाज़ उठाने में रह गया

ये मेरे साथी हैं प्यारे साथी मगर इन्हें भी नहीं गवारा

मैं अपनी वहशत के मक़बरे से नई तमन्ना के ख़्वाब देखूँ

इस महफ़िल में मैं भी क्या बेबाक हुआ

ऐब हुनर का सारा पर्दा चाक हुआ

ये तो सच है कि वो सितमगर है

दर पर आया है तो अमान में रख

पुस्तकें 18

Afsanvi Adab Aur Hayatullah Ansari

 

2019

अनीस की मर्सिया निगारी

 

1951

Batein Sukhan Ki

 

2018

Beeswin Sadi Ke Chand Akabir Ghazal Go

 

1966

हफ़ीज़ के गीत और नज़्में

 

1941

जिगर के ख़ुतूत

 

1965

कुल्लियात-ए-शेफ़्ता

 

 

मजज़ूब और उनका कलाम

 

1957

Masnawiyat-e-Meer Hasan

Sahr-ul-Bayan, Gulzar-e-Iram, Rumooz-ul-Aarifeen

1966

मुताला-ए-ग़ालिब

 

1957

ऑडियो 5

इल्म ओ फ़न के राज़-ए-सर-बस्ता को वा करता हुआ

कभी इक़रार होना था कभी इंकार होना था

ख़ुद को हर रोज़ इम्तिहान में रख

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

"लखनऊ" के और शायर

  • मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी
  • हैदर अली आतिश हैदर अली आतिश
  • मीर हसन मीर हसन
  • इमदाद अली बहर इमदाद अली बहर
  • इरफ़ान सिद्दीक़ी इरफ़ान सिद्दीक़ी
  • मीर अनीस मीर अनीस
  • यगाना चंगेज़ी यगाना चंगेज़ी
  • वज़ीर अली सबा लखनवी वज़ीर अली सबा लखनवी
  • सिराज लखनवी सिराज लखनवी
  • अरशद अली ख़ान क़लक़ अरशद अली ख़ान क़लक़