बेक़रारी पर चित्र/छाया शायरी

यूँ तो हमारे जीवन में

बे-क़रारी अर्थात व्याकुलता के कारण कई हैं । लेकिन शायरी में बे-क़रारी की जिन परिस्थितियों का वर्णन हुआ है उनका रिश्ता इश्क़ में मिलने वाली व्यकुलता से है । ऐसी बहुत सी परिस्थितियों से हम गुज़रते हैं लेकिन उन्हें शब्द नहीं दे पाते । यहाँ प्रस्तुत संकलन में आप महसूस करेंगे कि कैसे शायरी एहसास और बेचैनी की इन परिस्थितियों को चित्रित करती है ।

हम को न मिल सका तो फ़क़त इक सुकून-ए-दिल

बोलिए