रोमांटिक पर चित्र/छाया शायरी

रूमान के बग़ैर ज़िंदगी

कितनी ख़ाली ख़ाली सी होती है इस का अंदाज़ा तो आप सबको होगा ही। रूमान चाहे काइनात के हरे-भरे ख़ूबसूरत मनाज़िर का हो या इन्सानों के दर्मियान नाज़ुक ओ पेचीदा रिश्तों का इसी से ज़िंदगी की रौनक़ मरबूत है। हम सब ज़िंदगी की सफ़्फ़ाक सूरतों से बच निकलने के लिए रूमानी लम्हों की तलाश में रहते हैं। तो आइए हमारा ये शेरी इन्तिख़ाब एक ऐसा निगार-ख़ाना है जहाँ हर तरफ़ रूमान बिखरा पड़ा है।

अपनी आँखों के समुंदर में उतर जाने दे

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं

इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से

ओ देस से आने वाले बता

तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे

तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे

दिल में इक लहर सी उठी है अभी

तुम मिटा सकते नहीं दिल से मिरा नाम कभी

आवारा

चाँदनी रात बड़ी देर के बा'द आई है

गाहे गाहे बस अब यही हो क्या

आज जाने की ज़िद न करो

आवारा

इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से

तुम फिर उसी अदा से अंगड़ाई ले के हँस दो

तुम से मिलती-जुलती मैं आवाज़ कहाँ से लाऊँगा

एक चेहरा है जो आँखों में बसा रहता है

इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से

तुम फिर उसी अदा से अंगड़ाई ले के हँस दो

बोलिए