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Abdul Mannan Samadi's Photo'

अब्दुल मन्नान समदी

1988 | अलीगढ़, भारत

नई नस्ल के शायरों और फ़िक्शन लिखने वालों में शामिल, नज़्म और ग़ज़ल दोनों अस्नाफ़ में मस्रूफ़-ए-सुख़न

नई नस्ल के शायरों और फ़िक्शन लिखने वालों में शामिल, नज़्म और ग़ज़ल दोनों अस्नाफ़ में मस्रूफ़-ए-सुख़न

अब्दुल मन्नान समदी का परिचय

अब्दुल मन्नान समदी 16 अक्तूबर 1988 को अलीगढ़ के एक इल्मी ख़ानवादे में पैदा हुए। उनके वालिद-ए-मोहतरम इंजीनियर अब्दुस्समद हैं, जिनके नाम की निस्बत से अब्दुल मन्नान ने “समदी” तख़ल्लुस इख़्तियार किया।
इब्तिदाई तालीम का आग़ाज़ मदरसे से हुआ, जहाँ उन्होंने हिफ़्ज़-ए-क़ुरआन मदरसा अरबिया तामीर-ए-मिल्लत से किया। बाद अज़ाँ, उन्होंने फ़ज़ीलत की सनद जामिया दीनियात उर्दू (देवबंद) से हासिल की और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से क़ुरानिक स्टडीज़ में डिप्लोमा किया।
तालीमी सफ़र जारी रखते हुए, अब्दुल मन्नान समदी ने मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी (हैदराबाद) से बी.ए. और बी.एड. किया, जबकि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से एम.ए. (उर्दू) की डिग्री हासिल की।
शायरी में अब्दुल मन्नान समदी को दो असातिज़ा की रहनुमाई हासिल रही। पहले ख़ालिद नदीम फ़ारूक़ी, जिन्होंने उन्हें शायरी के बुनियादी उसूलों से रूशनास कराया, और दूसरे उनके हक़ीक़ी चचा, डाॅक्टर शहराम सरमदी, जिन्होंने उनकी अदबी तरबियत में अहम किरदार अदा किया। इस अदबी-ओ-इल्मी पस-मंज़र ने अब्दुल मन्नान समदी को एक मुमताज़ शायर के तौर पर उभारा है।

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