Ahmad Mushtaq's Photo'

पाकिस्तान के सबसे विख्यात और प्रतिष्ठित आधुनिक शायरों में से एक, अपनी नव-क्लासिकी लय के लिए प्रसिद्ध।

पाकिस्तान के सबसे विख्यात और प्रतिष्ठित आधुनिक शायरों में से एक, अपनी नव-क्लासिकी लय के लिए प्रसिद्ध।

ग़ज़ल 80

शेर 72

एक लम्हे में बिखर जाता है ताना-बाना

और फिर उम्र गुज़र जाती है यकजाई में

अहल-ए-हवस तो ख़ैर हवस में हुए ज़लील

वो भी हुए ख़राब, मोहब्बत जिन्हों ने की

इश्क़ में कौन बता सकता है

किस ने किस से सच बोला है

पुस्तकें 7

Aakhein Purani Ho Gayin

 

 

अंधे लोग

 

2011

Gard-e-Mahtab

 

1981

Kulliyat

 

2004

Mehrab

 

1977

Waqt Ki Ragni

 

1979

सवेरा

शुमारा नम्बर-050,051,052

1976

 

चित्र शायरी 24

थम गया दर्द उजाला हुआ तन्हाई में बर्क़ चमकी है कहीं रात की गहराई में बाग़ का बाग़ लहू रंग हुआ जाता है वक़्त मसरूफ़ है कैसी चमन-आराई में शहर वीरान हुए बहर बयाबान हुए ख़ाक उड़ती है दर ओ दश्त की पहनाई में एक लम्हे में बिखर जाता है ताना-बाना और फिर उम्र गुज़र जाती है यकजाई में उस तमाशे में नहीं देखने वाला कोई इस तमाशे को जो बरपा है तमाशाई में

आज रो कर तो दिखाए कोई ऐसा रोना याद कर ऐ दिल-ए-ख़ामोश वो अपना रोना रक़्स करना कभी ख़्वाबों के शबिस्तानों में कभी यादों के सुतूनों से लिपटना रोना तुझ से सीखे कोई रोने का सलीक़ा ऐ अब्र कहीं क़तरा न गिराना कहीं दरिया रोना रस्म-ए-दुनिया भी वही राह-ए-तमन्ना भी वही वही मिल बैठ के हँसना वही तन्हा रोना ये तिरा तौर समझ में नहीं आया 'मुश्ताक़' कभी हँसते चले जाना कभी इतना रोना

कैसे उन्हें भुलाऊँ मोहब्बत जिन्हों ने की मुझ को तो वो भी याद हैं नफ़रत जिन्हों ने की दुनिया में एहतिराम के क़ाबिल वो लोग हैं ऐ ज़िल्लत-ए-वफ़ा तिरी इज़्ज़त जिन्हों ने की तज़ईन-ए-काएनात का बाइस वही बने दुनिया से इख़्तिलाफ़ की जुरअत जिन्हों ने की आसूदगान-ए-मंजि़ल-ए-लैला उदास हैं अच्छे रहे न तय ये मसाफ़त जिन्हों ने की अहल-ए-हवस तो ख़ैर हवस में हुए ज़लील वो भी हुए ख़राब, मोहब्बत जिन्हों ने की

वीडियो 3

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Mil Hi Jayega Kaheen Dil Ko.. Ahmed Mushtaq ghazal by Bharathi Vishwanathan

भारती विश्वनाथन

चाँद इस घर के दरीचों के बराबर आया

असद अमानत अली

मिल ही जाएगा कभी दिल को यक़ीं रहता है

अज्ञात

ऑडियो 38

अब मंज़िल-ए-सदा से सफ़र कर रहे हैं हम

अब वो गलियाँ वो मकाँ याद नहीं

अश्क दामन में भरे ख़्वाब कमर पर रक्खा

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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