Font by Mehr Nastaliq Web

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर
Ajmal Siddiqui's Photo'

अजमल सिद्दीक़ी

1981 | दिल्ली, भारत

अजमल सिद्दीक़ी के शेर

1.1K
Favorite

श्रेणीबद्ध करें

आस पे तेरी बिखरा देता हूँ कमरे की सब चीज़ें

आस बिखरने पर सब चीज़ें ख़ुद ही उठा के रखता हूँ

बोल पड़ता तो मिरी बात मिरी ही रहती

ख़ामुशी ने हैं दिए सब को फ़साने क्या क्या

ये ही हैं दिन, बाग़ी अगर बनना है बन

तुझ पर सितम किस को पता फिर हो हो

कभी ख़ौफ़ था तिरे हिज्र का कभी आरज़ू के ज़वाल का

रहा हिज्र-ओ-वस्ल के दरमियाँ तुझे खो सका मैं पा सका

अलग अलग तासीरें इन की, अश्कों के जो धारे हैं

इश्क़ में टपकें तो हैं मोती, नफ़रत में अंगारे हैं

बाज़ार में इक चीज़ नहिं काम की मेरे

ये शहर मिरी जेब का रखता है भरम ख़ूब

दिल तो सादा है तेरी हर बात को सच्चा मानता है

अक़्ल ने बातें करते तेरा आँख चुराना देखा है

मेरे साथ सु-ए-जुनून चल मिरे ज़ख़्म खा मिरा रक़्स कर

मेरे शेर पढ़ के मिलेगा क्या पता पढ़ के घर कोई पा सका?

हर एक सुब्ह वज़ू करती हैं मिरी आँखें

कि शायद आज तो जाए वो हबीब नज़र

क्या क्या पढ़ा इस मकतब में, कितने ही हुनर सीखे हैं यहाँ

इज़हार कभी आँखों से किया कभी हद से सिवा बेबाक हुआ

जिस दिन से गया वो जान-ए-ग़ज़ल हर मिसरे की सूरत बिगड़ी

हर लफ़्ज़ परेशाँ दिखता है, इस दर्जा वरक़ नमनाक हुआ

वो मेरा हो कि हो क्या ग़रज़ मुझे इस से

हवस चराग़ की तुम को मुझे है भाता नूर

कभी नज़र की तरफ़ देखता है ख़ुद मंज़र

कभी नज़र पे फ़िदा होने ख़ुद है आता नूर

Recitation

बोलिए