Arifa Shahzad's Photo'

समकालीन पाकिस्तानी कवयित्रियों में महत्वपूर्ण, उर्दू की शिक्षिका

समकालीन पाकिस्तानी कवयित्रियों में महत्वपूर्ण, उर्दू की शिक्षिका

तुझे आग़ाज़ ही से पढ़ लिया था

तिरे चेहरे पे सब लिखा हुआ था

नश्तर जैसा अंदर इक चुभता काँटा है

जाने उस ने दुख बाँटा या दिल बाँटा है

ख़्वाब में जागती बे-ख़्वाबी पता पूछती है

क्या कहें नींद भी होती है सुलाने वाली