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फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

1911 - 1984 | लाहौर, पाकिस्तान

सबसे प्रख्यात एवं प्रसिद्ध शायर. अपने क्रांतिकारी विचारों के कारण कई साल कारावास में रहे।

सबसे प्रख्यात एवं प्रसिद्ध शायर. अपने क्रांतिकारी विचारों के कारण कई साल कारावास में रहे।

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ग़ज़ल 88

नज़्म 158

अशआर 81

और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा

राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा

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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है

लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है

कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब

आज तुम याद बे-हिसाब आए

और क्या देखने को बाक़ी है

आप से दिल लगा के देख लिया

दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के

वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के

क़ितआ 36

क़िस्सा 3

 

लेख 1

 

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शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

Taazaa hai abhi yaad mein ai gulfaam

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

चंद रोज़ और मिरी जान

चंद रोज़ और मिरी जान फ़क़त चंद ही रोज़ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

नसीब आज़माने के दिन आ रहे हैं

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

फ़र्श-ए-नौमीदी-ए-दीदार

देखने की तो किसे ताब है लेकिन अब तक फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

मिरे हमदम मिरे दोस्त!

गर मुझे इस का यक़ीं हो मिरे हमदम मिरे दोस्त फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

याद

दश्त-ए-तन्हाई में ऐ जान-ए-जहाँ लर्ज़ां हैं फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हम तो मजबूर थे इस दिल से

हम तो मजबूर थे इस दिल से कि जिस में हर दम फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हमारे दम से है कू-ए-जुनूँ में अब भी ख़जिल

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हार्ट-अटैक

दर्द इतना था कि उस रात दिल-ए-वहशी ने फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

jis roz qaza aaegi

किस तरह आएगी जिस रोज़ क़ज़ा आएगी फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

mere milne wale

वो दर खुला मेरे ग़म-कदे का फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

mulaqat

ये रात उस दर्द का शजर है फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

sar-e-wadi-e-sina

फिर बर्क़ फ़रोज़ाँ है सर-ए-वादी-ए-सीना फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

shishon ka masiha koi nahin

मोती हो कि शीशा जाम कि दुर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

tanhai

फिर कोई आया दिल-ए-ज़ार नहीं कोई नहीं फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

आज इक हर्फ़ को फिर ढूँडता फिरता है ख़याल

आज इक हर्फ़ को फिर ढूँडता फिरता है ख़याल फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

आज बाज़ार में पा-ब-जौलाँ चलो

चश्म-ए-नम जान-ए-शोरीदा काफ़ी नहीं फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

आज शब कोई नहीं है

आज शब दिल के क़रीं कोई नहीं है फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

''आप की याद आती रही रात भर''

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

इंतिसाब

आज के नाम फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

एक शहर-आशोब का आग़ाज़

अब बज़्म-ए-सुख़न सोहबत-ए-लब-सोख़्तगाँ है फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

कहाँ जाओगे

और कुछ देर में लुट जाएगा हर बाम पे चाँद फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ख़ुर्शीद-ए-महशर की लौ

आज के दिन न पूछो मिरे दोस्तो फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ख़ुशा ज़मानत-ए-ग़म

दयार-ए-यार तिरी जोशिश-ए-जुनूँ पे सलाम फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

गर्मी-ऐ-शौक़-ऐ-नज़ारा का असर तो देखो

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

चंद रोज़ और मिरी जान

चंद रोज़ और मिरी जान फ़क़त चंद ही रोज़ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ज़िंदाँ की एक शाम

शाम के पेच-ओ-ख़म सितारों से फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ज़िंदाँ की एक सुब्ह

रात बाक़ी थी अभी जब सर-ए-बालीं आ कर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तुम आए हो न शब-ए-इंतिज़ार गुज़री है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तुम ये कहते हो अब कोई चारा नहीं

तुम ये कहते हो वो जंग हो भी चुकी! फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तराना

दरबार-ए-वतन में जब इक दिन सब जाने वाले जाएँगे फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तिरे ग़म को जाँ की तलाश थी तिरे जाँ-निसार चले गए

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

तौक़-ओ-दार का मौसम

रविश-रविश है वही इंतिज़ार का मौसम फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दुआ

आइए हाथ उठाएँ हम भी फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दर्द आएगा दबे पाँव

और कुछ देर में जब फिर मिरे तन्हा दिल को फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दरीचा

गड़ी हैं कितनी सलीबें मिरे दरीचे में फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दस्त-ए-तह-ए-संग-आमदा

बेज़ार फ़ज़ा दरपा-ए-आज़ार सबा है फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

न किसी पे ज़ख़्म अयाँ कोई न किसी को फ़िक्र रफ़ू की है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

निसार मैं तेरी गलियों के

निसार मैं तिरी गलियों के ऐ वतन कि जहाँ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

फ़िक्र-ए-सूद-ओ-ज़ियाँ तो छूटेगी

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

बुनियाद कुछ तो हो

कू-ए-सितम की ख़ामुशी आबाद कुछ तो हो फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

बहार आई

बहार आई तो जैसे यक-बार फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

बहार आई

बहार आई तो जैसे यक-बार फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

मुझ से पहली सी मोहब्बत मिरी महबूब न माँग

मुझ से पहली सी मोहब्बत मिरी महबूब न माँग फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

रफ़ीक़-ए-राह थी मंज़िल हर इक तलाश के ब'अद

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

लहू का सुराग़

कहीं नहीं है कहीं भी नहीं लहू का सुराग़ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

लौह-ओ-क़लम

हम परवरिश-ए-लौह-ओ-क़लम करते रहेंगे फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

वहीं हैं दिल के क़राइन तमाम कहते हैं

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

शफ़क़ की राख में जल बुझ गया सितारा-ए-शाम

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

शोर-ए-बरबत-ओ-नय

पहली आवाज़ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

सुब्ह-ए-आज़ादी (अगस्त-47)

ये दाग़ दाग़ उजाला ये शब-गज़ीदा सहर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

सोचने दो

इक ज़रा सोचने दो फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हम ने सब शेर में सँवारे थे

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हम पर तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हम सादा ही ऐसे थे की यूँ ही पज़ीराई

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हम सादा ही ऐसे थे की यूँ ही पज़ीराई

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हमीं से अपनी नवा हम-कलाम होती रही

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हर सम्त परेशाँ तिरी आमद के क़रीने

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हिज्र की राख और विसाल के फूल

आज फिर दर्द-ओ-ग़म के धागे में फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सही

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ऑडियो 96

अब जो कोई पूछे भी तो उस से क्या शरह-ए-हालात करें

आए कुछ अब्र कुछ शराब आए

कब याद में तेरा साथ नहीं कब हात में तेरा हात नहीं

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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