Farooq Engineer's Photo'

फ़ारूक़ इंजीनियर

1960 | जयपुर, भारत

आँखों को यूँ भा गया उस का रूप-अनूप

सर्दी में अच्छी लगे जैसे कच्ची धूप

समय के धारे देख कर होता है विश्वास

एक एक दिन देखना शेर चरेंगे घास

किस को अब दिखलाएँ हम अपने दिल का ख़ून

सुनते आए हैं यही अंधा है क़ानून