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इन्दिरा वर्मा

1940 | दिल्ली, भारत

ग़ज़ल 20

शेर 20

ये शफ़क़ चाँद सितारे नहीं अच्छे लगते

तुम नहीं हो तो नज़ारे नहीं अच्छे लगते

आप का लहजा शहद जैसा तरन्नुम-ख़ेज़ है

ख़ामुशी अब तोड़िए और बोलिए मेरे लिए

Your accent is sweet as honey and melodious too

Break your silence now and say aomething, for me

अभी से कैसे कहूँ तुम को बेवफ़ा साहब

अभी तो अपने सफ़र की है इब्तिदा साहब

How can I call you unfaithful already

When this is only the beginning of our journey, sahab

वक़्त ख़ामोश है टूटे हुए रिश्तों की तरह

वो भला कैसे मिरे दिल की ख़बर पाएगा

Time, like snagged relationships,is silent

I wonder how he will find news of me

शाख़-दर-शाख़ होती है ज़ख़्मी

जब परिंदा शिकार होता है

Branch after branch gets wounded

When the bird becomes the prey

ऑडियो 20

अभी से कैसे कहूँ तुम को बेवफ़ा साहब

आज फिर चाँद उस ने माँगा है

उस से मत कहना मिरी बे-सर-ओ-सामानी तक

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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