Makhdoom Mohiuddin's Photo'

मख़दूम मुहिउद्दीन

1908 - 1969 | हैदराबाद, भारत

महत्वपूर्ण प्रगतिशील शायर। उनकी कुछ ग़ज़लें ' बाज़ार ' और ' गमन ' , जैसी फिल्मों से मशहूर

महत्वपूर्ण प्रगतिशील शायर। उनकी कुछ ग़ज़लें ' बाज़ार ' और ' गमन ' , जैसी फिल्मों से मशहूर

मख़दूम मुहिउद्दीन

ग़ज़ल 18

शेर 25

हयात ले के चलो काएनात ले के चलो

चलो तो सारे ज़माने को साथ ले के चलो

  • शेयर कीजिए

इश्क़ के शोले को भड़काओ कि कुछ रात कटे

दिल के अंगारे को दहकाओ कि कुछ रात कटे

आप की याद आती रही रात भर

चश्म-ए-नम मुस्कुराती रही रात भर

हम ने हँस हँस के तिरी बज़्म में पैकर-ए-नाज़

कितनी आहों को छुपाया है तुझे क्या मालूम

  • शेयर कीजिए

रात भर दर्द की शम्अ जलती रही

ग़म की लौ थरथराती रही रात भर

क़ितआ 5

 

क़िस्सा 2

 

पुस्तकें 29

Bisaat-e-Raqs

 

1976

Bisat-e-Raqs

 

1966

Bisat-e-Raqs

 

1986

बिसात-ए-रक़्स

 

1986

Bisat-e-Raqs

 

1976

Gul-e-Tar

 

1961

Hosh Ke Naakhun

 

1934

Hyderabad

 

 

Intikhab-e-Kalam-e-Makhdoom Mohiuddin

 

1952

Makhdoom

Intikhab-e-Kalam-e-Makhdoom Muhiuddin

1953

चित्र शायरी 4

तुम गुलिस्ताँ से गए हो तो गुलिस्ताँ चुप है शाख़-ए-गुल खोई हुई मुर्ग़-ए-ख़ुश-इल्हाँ चुप है उफ़ुक़-ए-दिल पे दिखाई नहीं देती है धनक ग़म-ज़दा मौसम-ए-गुल अब्र-ए-बहाराँ चुप है आलम-ए-तिश्नगी-ए-बादा-गुसाराँ मत पूछ मय-कदा दूर है मीना-ए-ज़र-अफ़शाँ चुप है और आगे न बढ़ा क़िस्सा-ए-दिल क़िस्सा-ए-ग़म धड़कनें चुप हैं सरिश्क-ए-सर-ए-मिज़्गाँ चुप है शहर में एक क़यामत थी क़यामत न रही हश्र ख़ामोश हुआ फ़ित्ना-ए-दौराँ चुप है न किसी आह की आवाज़ न ज़ंजीर का शोर आज क्या हो गया ज़िंदाँ में कि ज़िंदाँ चुप है

मोहब्बत हो तो जाती है मोहब्बत की नहीं जाती ये शोअ'ला ख़ुद भड़क उठता है भड़काया नहीं जाता

हयात ले के चलो काएनात ले के चलो चलो तो सारे ज़माने को साथ ले के चलो

 

वीडियो 26

This video is playing from YouTube

वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
'ग़ालिब'

तुम जो आ जाओ आज दिल्ली में मख़दूम मुहिउद्दीन

चाँद तारों का बन

मोम की तरह जलते रहे हम शहीदों के तन मख़दूम मुहिउद्दीन

बढ़ गया बादा-ए-गुल-गूँ का मज़ा आख़िर-ए-शब

मख़दूम मुहिउद्दीन

ऑडियो 8

आप की याद आती रही रात भर

उसी चमन में चलें जश्न-ए-याद-ए-यार करें

एक था शख़्स ज़माना था कि दीवाना बना

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

संबंधित शायर

  • नियाज़ हैदर नियाज़ हैदर समकालीन
  • वामिक़ जौनपुरी वामिक़ जौनपुरी समकालीन
  • साहिर लुधियानवी साहिर लुधियानवी समकालीन
  • मीराजी मीराजी समकालीन
  • फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ समकालीन
  • सज्जाद ज़हीर सज्जाद ज़हीर समकालीन
  • नून मीम राशिद नून मीम राशिद समकालीन
  • कैफ़ी आज़मी कैफ़ी आज़मी समकालीन
  • अख़्तरुल ईमान अख़्तरुल ईमान समकालीन
  • सलाम मछली शहरी सलाम मछली शहरी समकालीन

"हैदराबाद" के और शायर

  • जलील मानिकपूरी जलील मानिकपूरी
  • अमीर मीनाई अमीर मीनाई
  • शाज़ तमकनत शाज़ तमकनत
  • वली उज़लत वली उज़लत
  • ग़ौस ख़ाह मख़ाह  हैदराबादी ग़ौस ख़ाह मख़ाह हैदराबादी
  • रऊफ़ रहीम रऊफ़ रहीम
  • शफ़ीक़ फातिमा शेरा शफ़ीक़ फातिमा शेरा
  • मुसहफ़ इक़बाल तौसिफ़ी मुसहफ़ इक़बाल तौसिफ़ी
  • रऊफ़ ख़ैर रऊफ़ ख़ैर
  • रियासत अली ताज रियासत अली ताज